‪Dandi Beach‬
מה אנשים אומרים
Ishwarbhai J
מאת Ishwarbhai J
‪Dandi, a calm beech and proud history‬
‪אוג׳ 2017‬
‪विश्व शांति का प्रतिक “दान्डी” किनारा एक पवित्र समुंदर किनारा, जिसे गुजरात गवर्नमेंट ने हेरिटेज का दर्जा दिया हुआ है. सूरत सिटी से केवल 35 किलोमिटर दूर दांडी बीच, महज चालिस मिनिट कि दूरी पर है. या तो ट्रेन से आप नवसारी तक जाइये और फिर रिक्षा से बीच पर जाईये. नवसारी स्टेशन से केवल 16 किलोमिटर पर यह छोटासा गाव है. महात्मा गांधीजी के ब्रिटिशोंके खिलाफ “दांडी मार्च” का यह विश्व प्रसिद्ध् ऐतिहासिक स्थान है. यहा कि लोकल पब्लिक बहोत ही डीसेंट है. पुलिस कि पेट्रोलिंग हमेशा रहती है. इसीलिये इस बीच को हम पवित्र कहते है. अगस्त महिने का मौसम बिलकुल सही है यहा विजिट करनेके लिये. यहा अगर आपको एंजोय करना है तो सम्पूर्ण ज्वार के वक्त ना जाइये. क्योंकि यहा का किनारा बहोत सुंदर तरीकेसे बिलकुल हल्के से दूर समुंदर तक जाकर विलीन होता है. रेत एकदम महीम और भूरे काले रंग कि है. किनारे पर आप नहा भी सकते है. लेकिन पानी मे रेत का प्रमाण थोडा ज्यादा है. इसलिये स्किन पे इरिटेशन होगा. यहा पर अगर कुछ एंजोय करने लायक चीज है तो वो है, यहा कि छोटी छोटी कुटिया मे मिलने वाला गरमा गरम “कांदा भजिया”. अहाहा... सामने नीला समुंदर, ठंडी ठंडी हवा और गरमा गरम कांदा भजिया. खाने के शौकीन सुरती तो इसपर टूट पडते है. जिन्हे समुंदर से छोटे छोटे शंख, या रंगीन छोटे पत्थर जमा करने का शौक है, उन्हे यहा पर चार पांच घण्टे का अलग वक्त निकालकर जाना चाहिये. किनारे से लगकर ही बच्चोंके लिये सुंदर बागिचा है. बागिचा एवम किनारा सभी जगह पर अच्छी स्वच्छता दिखाई देती है. बागिचे मे बैठकर कुदरती सौंदर्य का लुत्फ उठाने के लिये साथ मे चटाई ले के जाना ना भूलिये. दूसरे बीचेस पर टॉयलेट बाथरूम कि सुविधा नही रहती. लेकिन यहा पर स्वच्छ टॉईलेट बाथरूम मिलेंगे. इसके लिये स्थानिक प्रशासन को धन्यवाद दीजिये. इन सबके अलावा अगर यहा कुछ बहोत बेहतरीन है तो वो है, अपने देश के इतिहास की खुश्बू. महात्मा गांधीजी कि कुटिया मे जाते ही आपको एक पवित्रता का एहसास होता है. बच्चों को संस्कार देने के लिये यह बहोत सही जगह है. ब्रिटीश राजसत्ता के खिलाफ अहिंसा कि मुवमेण्ट महात्माजी ने यही से मजबूत बनाई थी. उस ऐतिहासिक धरोहर को महसूस करना अपने आप मे एक सुखद अनुभव है. यहा का किनारा अत्यंत शांत है. कभी भी यह दरिया रौद्र रूप धारण नही करता. यहा की भौगोलिक स्थिती इस प्रकार से है, कि कहीं पर भी तूफान आये, यहा पर तूफानी हवा नही चलती है. यहा पर कभी भी भयंकर लहरे नही उठती है. शाम को चार बजे के बाद तो वातावरण इतना शांत हो जाता है, कि ध्वनि प्रदुषण के आदि शहर के लोग बेचैन होने लगते है. लेकिन जिन्हे शहर कि भागदौड से दूर कुछ घण्टे बिताने है तो जरूर दांडी समुंदर किनारे पर आ जाइये. एक बार आने के बाद बार बार यहा पर आने का मन करेगा. वन डे फेमिली ट्रिप के लिये यह एक बेहद सुंदर जगह है.‬

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Ishwarbhai J
סורט, הודו15 שיתופים
משפחה • ‪אוג׳ 2017‬
‪विश्व शांति का प्रतिक “दान्डी” किनारा

एक पवित्र समुंदर किनारा, जिसे गुजरात गवर्नमेंट ने हेरिटेज का दर्जा दिया हुआ है. सूरत सिटी से केवल 35 किलोमिटर दूर दांडी बीच, महज चालिस मिनिट कि दूरी पर है. या तो ट्रेन से आप नवसारी तक जाइये और फिर रिक्षा से बीच पर जाईये. नवसारी स्टेशन से केवल 16 किलोमिटर पर यह छोटासा गाव है. महात्मा गांधीजी के ब्रिटिशोंके खिलाफ “दांडी मार्च” का यह विश्व प्रसिद्ध् ऐतिहासिक स्थान है.
यहा कि लोकल पब्लिक बहोत ही डीसेंट है. पुलिस कि पेट्रोलिंग हमेशा रहती है. इसीलिये इस बीच को हम पवित्र कहते है. अगस्त महिने का मौसम बिलकुल सही है यहा विजिट करनेके लिये. यहा अगर आपको एंजोय करना है तो सम्पूर्ण ज्वार के वक्त ना जाइये. क्योंकि यहा का किनारा बहोत सुंदर तरीकेसे बिलकुल हल्के से दूर समुंदर तक जाकर विलीन होता है. रेत एकदम महीम और भूरे काले रंग कि है. किनारे पर आप नहा भी सकते है. लेकिन पानी मे रेत का प्रमाण थोडा ज्यादा है. इसलिये स्किन पे इरिटेशन होगा. यहा पर अगर कुछ एंजोय करने लायक चीज है तो वो है, यहा कि छोटी छोटी कुटिया मे मिलने वाला गरमा गरम “कांदा भजिया”. अहाहा... सामने नीला समुंदर, ठंडी ठंडी हवा और गरमा गरम कांदा भजिया. खाने के शौकीन सुरती तो इसपर टूट पडते है. जिन्हे समुंदर से छोटे छोटे शंख, या रंगीन छोटे पत्थर जमा करने का शौक है, उन्हे यहा पर चार पांच घण्टे का अलग वक्त निकालकर जाना चाहिये.
किनारे से लगकर ही बच्चोंके लिये सुंदर बागिचा है. बागिचा एवम किनारा सभी जगह पर अच्छी स्वच्छता दिखाई देती है. बागिचे मे बैठकर कुदरती सौंदर्य का लुत्फ उठाने के लिये साथ मे चटाई ले के जाना ना भूलिये. दूसरे बीचेस पर टॉयलेट बाथरूम कि सुविधा नही रहती. लेकिन यहा पर स्वच्छ टॉईलेट बाथरूम मिलेंगे. इसके लिये स्थानिक प्रशासन को धन्यवाद दीजिये.
इन सबके अलावा अगर यहा कुछ बहोत बेहतरीन है तो वो है, अपने देश के इतिहास की खुश्बू. महात्मा गांधीजी कि कुटिया मे जाते ही आपको एक पवित्रता का एहसास होता है. बच्चों को संस्कार देने के लिये यह बहोत सही जगह है. ब्रिटीश राजसत्ता के खिलाफ अहिंसा कि मुवमेण्ट महात्माजी ने यही से मजबूत बनाई थी. उस ऐतिहासिक धरोहर को महसूस करना अपने आप मे एक सुखद अनुभव है.
यहा का किनारा अत्यंत शांत है. कभी भी यह दरिया रौद्र रूप धारण नही करता. यहा की भौगोलिक स्थिती इस प्रकार से है, कि कहीं पर भी तूफान आये, यहा पर तूफानी हवा नही चलती है. यहा पर कभी भी भयंकर लहरे नही उठती है. शाम को चार बजे के बाद तो वातावरण इतना शांत हो जाता है, कि ध्वनि प्रदुषण के आदि शहर के लोग बेचैन होने लगते है. लेकिन जिन्हे शहर कि भागदौड से दूर कुछ घण्टे बिताने है तो जरूर दांडी समुंदर किनारे पर आ जाइये. एक बार आने के बाद बार बार यहा पर आने का मन करेगा. वन डे फेमिली ट्रिप के लिये यह एक बेहद सुंदर जगह है.‬
‪Written 5 בספטמבר 2017‬
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